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Friday, April 2, 2021

2 अप्रैल का भारत बंद दलित-आदिवासी आंदोलन के इतिहास में यादगार

2 अप्रैल का भारत बंद दलित-आदिवासी आंदोलन के इतिहास में यादगार 


2 अप्रैल का भारत बंद दलित-आदिवासी आंदोलन के इतिहास में यादगार


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दलित-आदिवासी समुदायों को थोड़ी बहुत सुरक्षा देने वाला एट्रोसिटीज़ का कानून को जब खत्म करने की कोशिश की गई तब 2 अप्रेल 2018 के दिन भारत में ST-SC के हकों के लिए ऐतिहासिक भारत बंद किया गया था। यह भारत बंद दलित-आदिवासी आंदोलन के इतिहास में हमेशा के लिए यादगार हो गया।  


2 अप्रैल के इस 'भारत बंद' में कोई एक नेता, पार्टी या कोई भी संगठन के आह्वान पर नहीं किया गया था, बल्कि इस बंद को तो सब ने स्वयंभू तरीके से सफल बनाया था। जो दलित-आदिवासी आंदोलन के इतिहास में यादगार रहेगा। अगर 2 अप्रैल को यह नहीं होता तो शायद आज दलित-आदिवासी समाज की सुरक्षा करने वाला एट्रोसिटीज़ का कानून खत्म हो चुका होता या फिर अब तक यह खत्म होने की कगार पर होता। 


इस आंदोलन के दौरान कई कार्यकता शहीद और घायल हुए थे, कई कार्यकता को महीनों जेल में गुज़ारने पड़े थे और कई कार्यकता पर अभी भी केस चल रहे है। इस इसीलिए आज के दिन सब से पहले तो हम सब मिल कर उन सभी दलित-आदिवासी कार्यकर्ताओं को नमन करते हैं जिन्होंने इसे सफल बनया और जो आंदोलन के दौरान शहीद हुए उन शहीदों को सलामी और श्रद्धांजलि।  


2 अप्रैल के इस 'भारत बंद' में किसी एक या दो राज्य में असर नहीं बल्कि लगभग सभी राज्य में इस का असर देखने को मिला था। इस में  गुजरात, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश आदि हिंदी पटी राज्य में बहुत ज्यादा असर देखने को मिला था।  


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